Aachar Sanhita आचार संहिता – कब क्यों और कैसे ?

आचार संहिता क्या होती है ?

आचार संहिता चुनाव के समय लगाए जाने वाले RULE या नियम है जिसको चुनाव आयोग चुनाव में भाग लेने वाले राजनेता और पार्टी के लिए निर्धारित करता है इसको आदर्श आचार संहिता कहते है

Aachar Sanhita से देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में चुनाव आयोग को सहायता मिलती है और इसके नियमों का पालन करना हर राजनेता की जिम्मेदारी होती है।

आचार संहिता द्वारा ये सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी, केंद्रीय या राज्य की अपने आधिकारिक पदों का चुनावों में लाभ हेतु गलत इस्तेमाल न करें।

आचार संहिता को चुनाव से कुछ समय पहले लगाया जाता है जिसके लगते ही सभी सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव आयोग के अधीन काम करते है

आदर्श आचार संहिता को कौन लागू करता है ?

आचार संहिता को चुनाव आयोग किसी भी राज्य या केंद्र के चुनाव से 2 या 3 महीने पहले लागू करता है | ये चुनाव की घोषणा के साथ ही लागु हो जाती है |

यदि चुनाव किसी राज्य की राजधानी/महानगरों/ नगर निगम में है तो आचार संहिता सिर्फ उसी इलाके में लगेगी लेकिन किसी जिले में चुनाव होने की स्थिति में ये नियम पुरे जिले पर प्रभावी होंगे

अगर कोई राजनेता आचार संहिता को नहीं माने तो

अगर कोई उम्मीदवार या पार्टी आचार संहिता के नियमों का पालन नहीं करते है तो चुनाव आयोग उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, संबंधित राजनेता को चुनाव लड़ने से रोक सकता है, उम्मीदवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

चुनाव आचार संहिता के नियम:

Chunav Aachar Sanhita में कई तरह के नियम लगते है जिनको आप यहाँ देख सकते है

चुनाव आचार संहिता होने के साथ ही सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं जिनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता है।

  • जनता के पैसे का इस्तेमाल किसी ऐसे कार्य में नहीं होगा जिससे किसी विशेष राजनीतिक दल या राजनेता को फायदा होता हो।
  • कोई भी नेता सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकते।
  • Chunav Aachar Sanhita लगते ही किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण या शिलान्यास का कार्य नहीं किया जा सकता। इसीलिए तो अपने सुना होगा की आचार संहिता लगने  से कुछ समय पहले सताधारी दल फटाफट शिलान्यास करने लगते है
  • किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को कोई रैली करनी हो तो उसकी इजाज़त पहले चुनाव आयोग से लेनी होगी।
  • किसी भी रैली में धर्म के नाम पर वोट नहीं मांग सकते।

चुनाव आचार संहिता में विज्ञापन के लिए नियम

  • आचार संहिता के लगने के बाद किसी भी चुनावी पार्टी या राजनेता को अपनी योजना का प्रचार विज्ञापन के माध्यम से करना मना होता है
  • पब्लिक कल लिए चलाई जा रही योजना के विज्ञापन या होर्डिंग लगे भी है तो उनको उतार दिया जाता है
  • किसी विशेष त्यौहार या दिवस के लिए विज्ञापन दिया जा सकता है लेकिन उस विज्ञापन पर किसी भी राजनेता की फोटो नहीं लगाई जा सकती और चुनावी एरिया के लिए कोई संकेत भी नहीं दिया जा सकता
  • किसी भी ऐसे दिन विज्ञापन नहीं लगाया जा सकता जिससे उस इलाके में पड़ने वाले वोट प्रभावित हो या उत्साहित हो

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Aachar Sanhita में नेताओ के दौरों का नियम

  • कोई भी मंत्री चाहे वह राज्य का हो या केंद्र का हो, चुनाव की घोषणा के बाद उस इलाके के दौरे सरकारी काम से नहीं कर सकते
  • अगर किसी को निर्वाचन इलाके का दौरा करना है तो वो अपने खर्चे से कर सकते है
  • आधारिकारिक कार्य के लिए किसी जगह पर जाते टाइम अगर कोई निर्वाचन इलाका बीच में पड़ता है तो उस इलाके के सरकारी कार्य में भाग नहीं ले सकते

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