अमरनाथ यात्रा – गुफा का इतिहास और रहस्य

अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra)

अमरनाथ यात्रा भगवान शिव की आराधना पर टिकी है, भगवान शिव को जीवीत भगवान माना गया है। उनके निवास के तीन स्थान बताये जाते हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कैलाश पर्वत दूसरा है लोहित गिरी जिसके नीचे से बह्ममपुत्र नदी बहती हैऔर तीसरा मुजवान पर्वत ।

भगवान शिव का जिक्र ऋगवेद के स्त्रोतो में मिलता है। प्राचीन भारत में भी शिव की अराघना की जाती थी और यह बात मोहनजोदडो तथा हडप्पा सस्ंकृति से स्पष्ट होती है।

अमरनाथ गुफा कहाँ पर है ?

अमरनाथ गुफा एक तीर्थ स्थान है जो भारत के जम्मू कश्मीर में स्थित हैं । अमरनाथ गुफा जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 3888 मी की ऊचाॅई पर स्थित है।

हिन्दू धर्म में amarnath yatra तीर्थ स्थान का काफी महत्व है। हिन्दूओं में अमरनाथ तीर्थ स्थान को काफी पवित्र माना जाता हैं। हर साल लाखो हिदु शिवलिंग के दर्शन करने के लिए गुफा तक जाते है।

अमरनाथ यात्रा गुफा

अमरनाथ गुफा में छत से पानी की बूदें नीचे गिरने लगती है तथा नीचे गिरते ही जम जाती है तथा वहाँ पर पत्थर का आक्षेप बन जाता हैं जिससे यह शिवलिंग बनता हैं ।

अमरनाथ गुफा का रहस्य:

  • स्थानीय इतिहासकार मानते है कि 1869 के गीष्मकाल में गुफा की फिर से खोज की गई और पवित्र गुफा की पहली औपचारिक amarnath yatra 3 साल बाद 1872 में आयोजित की गई।
  • एक अग्रेज लेखक लारेंस ने भी इस गुफा का जिक्र किया हैं।
  • पौराणिक मान्याता है कि एक बार कश्मीर की घाटी जलमग्न हो गई । उसने एक बडी झील का स्थान ले लिया।। जगत के प्राणियों की रक्षा के उद्देश्य से इस जल को अनेक छोटी छोटी जलधाराओं मंे विभक्त कर दिया। इसलिए जब पानी सूखने लगा तो सबसे पहले ऋषि भ¤गु ने अमरनाथ की गुफा को देखा।
  • मान्यता है कि तब से ही यह स्थान शिव अराधना का प्रमुख स्थान बन गया। आजकल बाबा अमरनाथ को बर्फानी बााबा भी कहते है। इसी तरह धर्म का बिगाड होता हैै। असल में यह अमरेश्वर महादेव का स्थान है।
  • अमरनाथ गुफा को पहली बार किसी मुस्लिम ने खोजा था। वह गुज्जर समाज का एक गडरिया था जिसे बूटा मलिक कहा जाता है।
  • इतिहास में इस बात का जिक्र किया जाता है कि महान शाशक आर्य राजा कश्मीर मे बने बर्फ की शिवलिग की पूजा करते थे। कल्हण द्वारा रचित राजतंरगिणी में भी इसे अमरेश्वर का नाम दिया गया है।
  • अमरनाथ की गुफा को पुरातत्व विभाग वाले 5 हजार वर्ष पुराना मानते है। अर्थात महाभारत काल में यह गुफा थी।

अमरनाथ यात्रा मार्ग

श्रदालु अमरनाथ गुफा की यात्रा श्रावणी मेंले के आसपास पहुचते है जो अक्सर जुलाई अगस्त में आता है।

Amarnath Yatra का रास्ता

अमरनाथ यात्रा जाने के दो मार्ग है, एक तो पहलगाव जो पारम्परिक मार्ग है तथा दूसरा है बालटाल से जो कि एक नया रास्ता हेैं।

Amarnath yatra में पहलगाम के रास्ते मे यात्रा करने पर 4 तीर्थ स्थल मिलते हैं

1 चदनबाडी
2 पिस्सू घाटी
3 शेषनाग
4 पचंतरणी

भक्तगण पहलगाम से पैदल ही यात्रा तय करते है। इसके बाद की यात्रा करने के लिए तकरीबन 5 दिन का समय लग जाता है। पहलगाव का अर्थ होता है गडरिए का गावं ।

पहलगाव जम्मू से 315 किलोमीटर जबकि श्रीनगर से 96 किलोमीटर दूर हैं । हम जम्मू से पहलगाव पहुचने के लिए टैक्सी या बस की सहायता ले सकते हैं या फिर श्रीनगर से जाए तो हवाई यात्रा के बाद वहां से कार बस या टैक्सी की सहायता से पहलगाम पहुचा जा सकता है।

इसके बाद यात्रियो को पहलगाम से चदनबाडी पहुचना होता हैं।इसके लिए वे सडक परिवहन का इस्तेमाल कर सकते हैं। तथा यहा ये कही भी अपना कैम्प लगा सकते हैं।यहा तक चढाव बहुत ही सरल होता है।

चदनबाडी से बिस्सु टापॅ तक पहुचा जाता हैं जो कि एक कठिन चढ़ाव हैं कहा जाता है यह पर देवताओं तथा राक्षसों में युद्ध हुआ था।

पिस्सू घाटी के बाद अगला पडाव 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शेषनाग है जिसमें भी कढिन चढाई की आवश्यकता होती है। इसी स्थान पर एक झील पर स्थ्ति है जिसे देखने पर लगता हे मानो आसमान इसमे उतर गया हो।

शेषनाग पहुचने के लिए सीधी चढाई करनी पडती है यह पवित्र अमरनाथ की गुफा तक के रास्ते में आखिरी कैम्प है जो कि एक कठिन रास्ता है।

ठडी और सर्द हवाए अपना असर दिखाना शुरू कर देती है तथा इतनी उचाई पर आक्सीजन भी कम होने लगती है जिससे श्वसन में कठिनाई होती हैं।

अब आखिर मे पांच जल-धाराओं से युक्त पंचतरणी से अमरनाथ गुफा की दूरी महज 6 किलोमीटर है तथा बीच मे रूकने का भी स्थान नही हैं इसलिए हमे यात्रा जल्दी शुरू करनी चाहिए ताकि बेस कैम्प तक समय रहते पहुच जाए। पूरा रास्ता ही मनोरम तथा रमणीय है।

एक अन्य रास्ता बटलाल का भी है लेकिन यह रास्ता ज्यादा कठिन है सरकार भी पहलगाम के रास्ते से यात्रा करने की सलाह देती हैं । परंतु बटलाल को बेस केम्प बनाकर भी यात्रा पूरी की जा सकती है।

अमरनाथ यात्रा का महत्व

अमरनाथ गुफा का महत्व सिर्फ इसलिए नही है कि यहां हिम शिवलिंग का निमार्ण होता है इस गुफा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी गुफा में भगवान शिव ने अपनी पत्नी पार्वती को अमरतत्व का मंत्र सुनाया था।

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात श्री अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते है।

स्वामी विवेकानंद ने भी 1898 में 8 अगस्त को अमरनाथ गुफा की यात्रा की थी और बाद में उन्होने कहा था बर्फ रूप में बने शिवलिंग में भगवान शिव स्वयं है। मैंने ऐसी सुन्दर इतनी प्रेरणादायक कोई चीज नही देखी ओर न ही किसी धार्मिक स्थल का इतना आनंद लिया हैं।

Amarnath Gufa हमारा दायित्व

हिमलिग और अमरनाथ की प्रकृति की रक्षा करनी जरूरी हैं कुछ वर्षो से बाबा amarnath gufa के दर्शन के लिए आने वाले श्रदालुओं की सख्यां में बढोतरी हुई है, जिसके चलते यहाँ मानव की गतिविधियाॅ भी बढी है जिसका प्रभाव बढते यहां के तापमान से देखा जा सकता है कुछ श्रदालु यहां धूप बौर दीप भी जलाने लगे है जो कि हिमलिंग ओर गुफा के प्राकृतिक असितत्व के लिए घातक सिद हुई है ।

शिवलिंग को छूकर धूप या दीपक जलाकर अपनी श्रदा प्रकट करना गलत है। हमे इसका ध्यान रखना चाहिए।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड

amarnath yatra में लोगो की बढती भीड को देखकर सन 2000 में श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की स्थापना की गयीं।

श्रदालुओ की कठिनाईयों को दूर करने के लिए केद्र सरकार ने 26 मई 2008 को श्री अमरनाथ अमरनाथ श्राइन बोर्ड को बालटाल के पास डोमेल मे वन विभाग की 40 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गयी ताकि यात्रियो को सुविधा हो सके।

Amarnath yatra 2019

  • Amarnath Yatra 2019 जुलाई महीने से चालू होगी जिन लोगो ने इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है वो जुलाई से अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए जा सकेंगे

आपको बता दे की amarnath yatra में छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और 75 साल से बड़े बुजुर्गों को जाने की मनाही है क्योंकि amarnath yatra बहुत ही रिस्की है |

अमरनाथ यात्रा में आप हेलीकाप्टर की सेवा भी ले सकते है, क्योंकि एक राश्ते से सिर्फ 7500 यात्रियों को परमीशन दी जाती है |

और अधिक जाने श्री अमरनाथ यात्रा

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