Plasma Therapy in Hindi कोरोना वायरस में प्लाज्मा थेरेपी की कामयाबी

Plasma Therapy in Hindi कोरोना वायरस में प्लाज्मा थेरेपी की कामयाबी

Plasma Treatment: प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy in Hindi) 100 साल से भी पुरानी पद्धति है जिसमे खून में पाया जाने वाले प्लाज्मा से एंटीबॉडी विकसित की जाती है जिससे किसी रोग को लड़ने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जा सके |

भारत सरकार ने कोरोना वायरस (COVID-19) के ट्रीटमेंट के लिए पहले से ठीक हो चुके लोगो के खून से एंटीबॉडी बनाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी के लिए मंजूरी दी है |

Plasma Therapy in Hindi

प्लाज्मा थेरेपी को 1890 में जर्मनी के फिजियोलॉजिस्ट एमिल वॉन बेह्रिंग ने खोजा था |

हमारे शरीर के खून में चार तरह की चीज पाई जाती है जिसमें रेड ब्लड सेल, वाइट ब्लड सेल, प्लेट्लेट्स और प्लाज्मा शामिल है |

plasma therapy के माध्यम से किसी भी रोग से ठीक हुए व्यक्ति के खून के प्लाज्मा से क्लिनिकल ट्रायल करके उस रोग से लड़ने की क्षमता वाली एंटीबॉडी बनायी जाती है |

एंटीबॉडी: जब कोई व्यक्ति किसी बीमारी से स्वस्थ होता है तो उसके शरीर में कीटाणुओं/जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है उसे ही एंटीबॉडी कहा जाता है |यहाँ सभी के शरीर के हिसाब से अलग अलग होती है |

किसी में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है तो उसमे रोग से लड़ने के लिए बिना दवाई लिए भी ठीक होने की गूंजाइस होती है लेकिन अगर शरीर की क्षमता कम है तो उसको दवाई या ICU के सहारे भी रखना पड़ सकता है |

कैसे काम करती है प्लाज्मा थेरेपी एंटीबॉडी

एंटीबॉडी विकसित हुए शरीर से खून लिया जाता है, जिसमे से प्लाज्मा को अलग किया जाता है |

फिर उसी एंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा को दुसरे व्यक्ति (जिसको रोग हो) के शरीर में डाला जाता है जिससे उसके शरीर में उपयुक्त एंटीबॉडी वाला प्लाज्मा पहुँच जाता है और उसके रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है |

कोरोना वायरस में प्लाज्मा थेरेपी कैसे काम करेगी

कोरोना वायरस एक नए तरह का वायरस अभी पूरी दुनिया में फैला हुआ है जिसका कोई इलाज अभी तक डॉक्टर और साइंटिस्ट को नहीं मिल पाया है, इसलिए दुनियाभर के डॉक्टर अलग अलग तरह के प्रयोग कर रहे है इसके इलाज को खोजने में |

लेकिन मौत के आंकड़े को बढ़ते देख इसमें कुछ नए पुराने सभी तरह के प्रयोग किया जा रहे है, मलेरिया की दवा भी काफी कारगर साबित हो रही है |

इसलिए केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से ठीक हुए लोगो से एंटीबॉडी लेने के लिए दिल्ली, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को ट्रायल के तौर पर मंजूरी दी है |

कितनी कामयाब है प्लाज्मा थेरेपी ?

Plasma Therapy in Hindi

कोरोना वायरस के लिए अभी इसका शोध होना स्टार्ट हुआ है, जैसे जैसे दिन बीतेंगे डॉक्टर अपनी रिपोर्ट देंगे |

लेकिन माना ये जा रहा है की जबतक इसका पुख्ता इलाज नहीं मिल जाता तब तक इसके लिए ट्रायल किया जा सकता है, हॉस्पिटल वाले ठीक हुए लोगो से एंटीबॉडी लेके बीमार शरीर में डालेंगे |

कामयाब होने की उम्मीद: इसमें कामयाब होने की उम्मीद इससे लगाई जा सकती है की जिन के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता ज्यादा है वो जल्दी स्वस्थ हो रहे है और जवानों में मौत का आंकड़ा भी कम है |

चीन में (plasma therapy in hindi) डॉक्टरों को कुछ हद तक कामयाबी मिली है |

कामयाब न होने के कारण: अभी पिछले दिनों चीन के वुहान से आई रिपोर्ट के मुताबित जो लोग एक बार स्वस्थ हो गये थे जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गयी थी वो फिर से पॉजिटिव पाए गये है, जिससे इसकी कामयाबी पर फ़िलहाल कुछ कह नहीं सकते |

Plasma Donor कौन?

स्वस्थ हो चुके व्यक्ति से खून निकलकर प्लाज्मा लिया जाता है और बाकी खून वापस शरीर में डाल दिया जाता है |

कोरोना से 14 दिन बाद ठीक हुए व्यक्ति की 2 3 रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही सैंपल लिया जाता है |

डोनर का पहले एलिज टेस्ट किये जाता है जिससे उसके शरीर में मौजूद कुल प्लाज्मा का पता लगाया जा सके |

किसी एक डोनर के खून से 800 मिलीमीटर तक प्लाज्मा लिया जा सकता है जिसको 4 मरीजो में डाला जा सकता है, प्रत्येक मरीज के शरीर में 200 मिलीमीटर प्लाज्मा डाल सकते है |

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आयुष्मान भारत सेन्टर

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