Connect with us

Business

पारदर्शी कराधान इमानदार को सम्मान भारत सरकार Tax Payer Relief

Published

on

व्यापारियों को टैक्स भरने के समय आने वाली समस्या से निजात दिलाने पारदर्शी कराधान इमानदार को सम्मान लांच |

पारदर्शी कराधान इमानदार को सम्मान भारत सरकार

किसी भी बिज़नस करने वाले के लिए टैक्स भरने के बाद भी विभिन्न तरह की प्रताड़ना झेलना आम बात थी इसी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने Trasparance taxation: honouring the honest. नाम से नया टैक्स चार्टर की घोषणा की है |

अभी क्या समस्या है टैक्स पेयर की

भारत में 130 करोड़ की जनसंख्या है लकिन टैक्स भरने वालो की संख्या 1.5 करोड़ के लगभग ही है | बहुत से ऐसे मामले है जिनमे इमानदार बिज़नसमैन टैक्स भरना भी चाहे तो इस परक्रिया में आने वाली दिकतो से डर जाता है |

व्यापारी को बेवजह अधिकारी द्वारा डराया जाता है, टैक्स नोटिस को इतना कड़ा बना दिया है की वो किसी कोर्ट के आर्डर से भी भयावह है |

इसी को ध्यान में रखकर और इसी Digital India के सपने के साथ अब ये प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया जायेगा जिस पर व्यापारी अपना टैक्स भर सकेगा और नोटिस भी किसी अधिकारी से न आकर कंप्यूटर आधारित होगा |

इसके कारण व्यापारी और अधिकारी के बीच होने वाली सांठगाँठ ख़त्म होगी और दोनों आपस में नहीं मिलेगे |

किसी भी मामले की अपील भी ऑनलाइन की जा सकेगी, केंद्रीकृत सिस्टम के बाद उसकी सिकायत लोकल अधिकारी को ट्रान्सफर कर दी जायेगा |

Tax Payer Relief Modi Government

Moto: Seamless, painless and fearless

व्यापारियों को मिलने वाला फायदा:

  1. अधिकारियो के उत्पीड़न से मुक्ति
  2. समय पर कर देने पर प्रोत्साहन
  3. मामले की अपील के लिए तंत्र
  4. मामले का जल्दी निपटारा
  5. डायरेक्ट नियम के तहत कम खर्चीला और आसान

सरकार को मिलने वाला फायदा

  1. सरकार उम्मीद करती है की इससे टैक्स पेयर की संख्या बढ़ेगी
  2. ईमानदारी से व्यापारी बिना डरे टैक्स भर पाए
  3. सांठगाँठ के मामले ख़त्म करना
Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Business

Lease deed in Hindi | किरायेदार एग्रीमेंट

Published

on

lease deed in hindi

lease deed in hindi: किसी भी प्रॉपर्टी (Building) को अपने मालिकाना हक़ से लम्बे समय तक किराये पर देना ही लीज डीड कहलाता है| Lease Deed ज्यादातर लम्बे समय तक फ़िक्स किराये पर ली जाती है जिसमे रिपेयर और मेन्टेनेन्स का ख़र्चा भी किरायेदार ही उठाता है |

लीज डीड हिंदी में (lease deed in hindi):

भारत में transfer of property act 1882 के सेक्शन 105 के तहत अपनी मर्जी से किसी को अपनी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक़ कुछ समय तक देना ही लीज डीड के अंतर्गत आता है |

Lease Deed का agreement समय कितना होगा, ये मालिक (Lesser) और किरायेदार (Lessee) के उपर निर्भर करेगा, ज्यादातर ये समय 12 महीने से ज्यादा होता है | फिर आगे 5 साल, 10 साल या उससे भी ज्यादा हो सकता है |

कुछ कंडीशन में यह समय 12 महीने से कम भी होता है लेकिन 12 महीने से कम समय में Lease Deed की जगह Rent Deed काम में लिया जाता है |

उदाहरण: जैसे ऑफिस के लिए लम्बे समय तक बिल्डिंग किराये पर लेना, घर किराये पर लेना आदि

Rent Deed (रेंट डीड हिंदी में)

लीज डीड की तरह रेंट डीड होता है लेकिन इसमें किरायेदार के पास सिर्फ कुछ समय का हक़ होता है फिर किराया बदल भी सकता है, रिपेयरिंग का खर्चा मालिक खुद वहन करता है |

उदाहरण: जैसे 1 दिन के लिए गाड़ी किराये पर लेना, मशीन किराये पर लेना या 11 महीने तक घर किराये पर लेना आदि

Lease deed vs rent deed (लीज डीड और रेंट डीड में अंतर)

Lease Deed में समय लम्बा होता है रेंट डीड का समय 11 महीने या उससे कम हो सकता है

लीज डीड में रिपेयरिंग का खर्चा खुद किरायेदार लगाता है लेकिन रेंट डीड में मालिक लगाता है

लीज डीड का एग्रीमेंट तोड़ने पर मालिक पर भारी पेनल्टी लगाई जाती है ये पेनल्टी 12 महीने तक के किराये की भी हो सकती है

Lease deed का यह फायदा है की आपका रेंट फ़िक्स होता है, जितने साल तक आपको बिल्डिंग चाहिए और मालिक के लिए यह फायदा है की उसकी प्रॉपर्टी लम्बे समय तक किराये पर लग जाती है तो बार बार नए किरायेदार ढूढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती है

आपको कौन सा एग्रीमेंट करना चाहिए:

अगर आप अपने बिज़नस के लिए लम्बे समय तक ऑफिस की तलाश कर रहे है तो Lease Deed Hindi आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें आपको किराया फिक्स देना पड़ता है और रोज रोज के ऑफिस बदलने का चक्कर भी नहीं रहता है

लेकिन आपका रहने का समय कम है तो आपको लम्बा एग्रीमेंट करने की जरूरत नहीं है, इसलिए रेंट एग्रीमेंट सही रहेगा |

Lease Deed agreement:

lease deed के एग्रीमेंट में ये लिखा जाता है की यह शॉप (प्रॉपर्टी) इतने समय तक इतने किराये पर मालिक (xyz) द्वारा किरायेदार (abc) को लीज पर दी जाती है, और अगर प्रॉपर्टी कमर्शियल नहीं है तो इसमें कुछ कंडीशन भी जोड़ दी जाती है |

जैसे रेजिडेंशियल में कमर्शियल एक्टिविटी करना मना है या एग्रीमेंट तोड़ने संबधित कंडीशन आदि

और देखे: भू नक्शा राजस्थान https://rajhindi.com/bhu-naksha-rajasthan/

Continue Reading

Business

LIC IPO in Hindi: एलआईसी शेयर

Published

on

LIC IPO in Hindi share price

भारतीय जीवन बीमा निगम के शेयर को अब सरकार मार्केट में (LIC आईपीओ) लाने जा रही है, बजट 2020-21 में वित् मंत्री ने इस बात की पुष्टि कर दी है

LIC IPO in Hindi

एलआईसी का आईपीओ इस वित् वर्ष के दुसरे क्वार्टर में आ सकता है, इसमें lic अपने हिस्से के कुछ शेयर (10%) बेच सकती है, बाज़ार में lic की कीमत 8 से 10 लाख करोड़ आंकी जा रही है |

क्या होता है आईपीओ

IPO: Initial public offering

कोई भी कंपनी शेयर मार्केट में लिस्ट होकर पब्लिक से पैसे इकट्ठा करना चाहती है तो stock exchange में आईपीओ लाना पड़ता है, इसके बाद शेयर मार्केट में कंपनी लिस्ट हो जाती है

हमारे देश भारत में शेयर मार्केट को सेबी कण्ट्रोल करता है

NSE BSE in Hindi

शेयर मार्केट के दो बड़े नाम NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और BSE(बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) द्वारा कंपनी और रिटेल इन्वेस्टर के बीच पैसे और शेयर का एक्सचेंज करवाया जाता है |

LIC आईपीओ के फायदे:

LIC देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है, एलआईसी के पास लगभग मार्केट के 70% बीमा की हिस्सेदारी है, सरकार इसे साझा करके फण्ड रेज करना चाह रही है

lic की साख पीछे के सालो में काफी अच्छी रही है, और ये देश की रिलाएबल insurance है इन्वेस्टर भी चाहते है अपना पैसा एसी profitable कंपनी में लगे

शेयर मार्केट में कंपनी के शेयर आने से कंपनी को अपनी क्वार्टर रिपोर्ट मार्केट में दिखानी पडती है जिससे पारदर्शीता बढेगी

LIC IPO in Hindi

अगर कुछ गड़बड़ भी होती है तो इसके शेयर प्राइस में impact पड़ता है

सऊदी अरामको जैसा होगा LIC का IPO

पिछली साल सऊदी अरामको का आईपीओ लाया गया था जिसको बहुत बड़ी सफलता मिली और सबसे ज्यादा फण्ड मार्केट से उठाने में कामयाब रही थी |

असोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट विजय भूषण ने कहा, “बाजार के लिए एलआईसी का आईपीओ सऊदी अरामको की तरह दशक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा”

क्या बीमा धारको को नुकशान होगा

नहीं, बीमा धारको को कोई नुकशान नहीं है| lic का प्रबंधन और निदेशन सरकार के पास ही रहेगा

हालाँकि इसकी त्रिमासिक रिपोर्ट से हो सकता है कुछ नियम इन्वेस्टर के हिसाब से बदलने पड़ सकते है

LIC हाउसिंग फाइनेंस

अभी शेयर मार्केट में lic का हाउसिंग फाइनेंस शेयर लिस्ट है जिसकी कीमत 405 रूपये के लगभग है |

more: https://rajhindi.com/

Continue Reading

Business

वित्त मंत्री ने लांच किया eBkray प्लेटफॉर्म, रूपे और यूपीआई होंगे MDR फ्री

Published

on

nirmala sitaraman bank meeting

नई दिल्ली: वित् मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बैंक मीटिंग में ऑनलाइन प्रॉपर्टी नीलामी के लिए eBkray प्लेटफॉर्म लाँच किया, इसी के साथ UPI और Rupay Card पर MDR हटा दिया है

eBkray नीलामी प्लेटफार्म:

eBkray एक ऑनलाइन प्लेटफार्म है जहाँ पर बैंक अपनी एसेट को बेच/नीलाम कर सकते हैं इसमें एसेट नेविगेशन के साथ प्रॉपर्टी सर्च करने का ऑप्शन मिलता है एक सिंगल विंडो से सभी ऑक्शन साइट की जानकारी यहां पर मिलेगी

अब तक eBkry प्लेटफार्म पर 35000 प्रॉपर्टी रजिस्टर हो चुकी है

eBkray प्लेटफार्म से बैंक द्वारा नीलम की गई प्रॉपर्टी प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी आएगी

सरकार का उद्देश्य बैंकों के एनपीए को घटाना है, आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2018 में एनपीए 8.96 लाख करोड था जो सितंबर 2019 में घटकर 7.27 लाख करोड़ रह गया है

MDR Charges: मर्चेंट डिस्काउंट रेट

एमडीआर चार्ज किसी भी मर्चेंट के द्वारा बैंक को दिया जाने वाला चार्ज है, यह कस्टमर से Online Payment लेने की एवज में दुकानदार द्वारा बैंक को दिया जाता है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जनवरी 2020 से एमडीआर चार्ज को हटा दिया है, यूपीआई और रुपे कार्ड से ऑनलाइन लेनदेन करने पर MDR चार्ज नहीं लगेगा

MDR किसी भी ऑनलाइन पेमेंट की कीमत पर 2% तक लगता है, जो अभी UPI और RUPAY कार्ड के ऑनलाइन transaction को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा हटाया गया है |

Continue Reading
error: Content is protected !!